कुकर की सीटी by योगिता वार्डे Book Review


कुकर की सीटी by योगिता वार्डे
 

कुकर की सीटी by योगिता वार्डे is one of the most honest pieces of literature you’ll ever read. Inspired by real-life stories during the pandemic this book is worth putting in the hands of more readers.


Not only does this book motivates us to tackle the toughest situations with a positive mindset, but it also touches upon the gravity of the nationwide Lockdown.


Social Topics like Women's Empowerment, Mental Health, and Poverty are covered beautifully without deviating from the overall theme of the book.



It also talks about what it means to be a female in a male-dominated society. It is always a delight to see more and more books with strong Indian female characters fighting to equal the unequal.


On the other hand, it makes you question the importance of humanity in an Influencer era where people are turning towards social work to increase their overall Social Media engagement.



It invites you to rethink your success in terms of social likes, and direct yourself towards lifelong happiness by simply being human.


Overall, कुकर की सीटी by योगिता वार्डे is heartfelt, relatable, and powerful - which makes for a raw yet fun read.


RATING: 4.5/5


PRINT LENGTH: 155 pages


LANGUAGE: Hindi


PUBLISHER: FlyDreams Publications


GENRE: Contemporary Fiction

 

ABOUT THE AUTHOR

 

योगिता वार्डे जी लगभग पूरी दुनिया घूम चुकी हैं। कहानियाँ और कविताएँ लिखने का शौक इन्हें बचपन से ही रहा है, मगर कविताएँ और कहानियाँ, इनके संदूक से कभी बाहर नहीं आई।



फिर इन्होंने एक बार अपनी कहानियों को समेटा, उन्हें पुनः जिया। उन कहानियों को उनके मुकाम तक पहुँचाने का ठान लिया। वहीं से शुरू हुआ इनके लिखने का सफ़र।


इनकी किताबों का सफ़र ‘साही ‘&’ सुधीर’ से शुरू हुआ। उसके बाद ‘दीया’ और ‘पोस्ट कार्ड (हर ज़िन्दगी कुछ कहती है)’ अभी तक यह तीनों किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं।


तीनों किताबों का अंग्रेजी में अनुवाद भी हो चूका है और वे प्रकाशित भी हो चुकी हैं।


‘कुकर की सीटी’ इनकी चौथी किताब है, यह फ्लाइड्रीम्स से इनकी पहली किताब है।



इनके कई आर्टिकल न्यूज़पेपर और मैगज़ीन में आ चुके हैं। इन्हें किताब ‘दीया’ के लिए ‘Best Author Of The Year’ का अवार्ड भी मिल चुका है।

 

ABOUT THE BOOK

 

जब हमने हँसते-मुस्कुराते हमेशा की तरह 2020 में प्रवेश किया, तब कहाँ पता था कि हमारी आने वाली ज़िंदगी में हमें एक बीमारी के चलते 'लॉकडाउन' में रहना पड़ेगा।


लॉकडाउन हम सभी के लिए कठिन दौर रहा, जहां हमारे ऊपर क्या-क्या गुजरा, हमें किन-किन चीजों का नया अनुभव हुआ।



किस तरह हम कहीं आ-जा नहीं सकते थे।

किस तरह हम घरों में रहने पर मजबूर हुए।


किस तरह हँसना-रोना, बिछड़ना, तकलीफें, स्कूल बंद रहे, वर्क फ्रॉम होम किया।


किस तरह मजदूरों की घर वापसी हुई, वहीं बच्चे अपनी नानियों के घर नहीं जा सके।


किस तरह हम डिज़िटल दुनिया में बीस साल आगे हो गए।


किस तरह हमारी ज़िन्दगी में सोशल मीडिया ने अहम रोल निभाया।


किस तरह हमने अपने परिवार के साथ समय बिताया।



कहीं किसी की शादी का टूटना, कहीं किसी का साथ हमेशा के लिए छूटना।


इन सभी अनुभवों का लेखा-झोखा है यह किताब....


'कुकर की सीटी' में छह नाटकों का संकलन है, जो कि लॉकडाउन पर आधारित हैं।


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ABOUT THE REVIEWER

 

Salis Afaque is the CEO and Founder of SALISMANIA.com, a modern-day Social Media Management and Book Promotion website servicing Best-selling Authors and Entrepreneurs in India.


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